प्राकृतिक खेती ही भारत का भविष्य – राज्यपाल आचार्य देवव्रत जी
रासायनिक खेती छोड़कर देशी गाय आधारित प्राकृतिक कृषि अपनाने का आह्वान
आणंद कृषि विश्वविद्यालय का 22वां दीक्षांत समारोह संपन्न
आणंद,(गुजरात)सोमवार :
आणंद कृषि विश्वविद्यालय का 22वां दीक्षांत समारोह राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत जी की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री जीतुभाई वाघाणी तथा पद्मश्री डॉ. जे. एम. व्यास की गरिमामयी उपस्थिति रही।

समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत जी ने कहा कि प्राकृतिक खेती ही भारत का भविष्य है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग की गंभीर समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि छोटी बीमारियों का इलाज संभव है, लेकिन जब प्रकृति पर अतिवृष्टि, अनावृष्टि या समुद्री तूफान जैसे बड़े संकट आते हैं, तो मानव के पास कोई समाधान नहीं होता।

राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण प्रदूषण के लिए पशु-पक्षी या अन्य जीव-जंतु नहीं, बल्कि केवल मानव समाज ही जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती पर्यावरण असंतुलन का एक प्रमुख कारण है। हरित क्रांति की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि इसके जनक डॉ. स्वामीनाथन ने भी रासायनिक खेती के साथ पारंपरिक कृषि पद्धतियों को बनाए रखने की सलाह दी थी, जिसे नजरअंदाज किया गया।


उन्होंने बताया कि यूरिया-डीएपी के अत्यधिक उपयोग से देश की भूमि का ऑर्गेनिक कार्बन, जो पहले 2 से 2.5 प्रतिशत था, आज घटकर 0.2 से 0.4 प्रतिशत रह गया है। 0.5 प्रतिशत से कम ऑर्गेनिक कार्बन वाली भूमि को बंजर माना जाता है। यूएनओ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भूमि की उर्वरता घटने से कृषि उत्पादन में लगभग 10 प्रतिशत की कमी आई है, जिससे लागत बढ़ रही है और फसलों की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है।

राज्यपाल ने रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि खेतों में प्रयुक्त रसायन भूमि और पानी में मिलकर मानव स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं। नाइट्रोजन से बनने वाली नाइट्रस ऑक्साइड गैस कार्बन डाइऑक्साइड से 312 गुना अधिक खतरनाक है। कैंसर, हार्ट अटैक और डायबिटीज जैसी बीमारियों का बढ़ना इसी का परिणाम है। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं का समाधान प्राकृतिक खेती है, जो जैविक खेती से अलग और अधिक प्रभावी है।
युवा स्नातकों से अपील करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वे रासायनिक खेती का प्रचार न करें, बल्कि प्राकृतिक खेती पर शोध कर सच्चाई को समझें और आगे बढ़ें। उन्होंने इसे मानवता की सबसे बड़ी सेवा बताते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती एक साथ पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, धरती माता, गौ माता, जनस्वास्थ्य और किसानों की आय बढ़ाने का कार्य करती है।
कृषि मंत्री श्री जीतुभाई वाघाणी ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और यही युवा शक्ति राष्ट्र निर्माण की नींव है। उन्होंने विद्यार्थियों से खेती को आधुनिक तकनीक, डेटा एनालिसिस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कृषि अब केवल श्रम नहीं, बल्कि विज्ञान और नवाचार का क्षेत्र है, जिसमें एग्री-स्टार्टअप और फूड प्रोसेसिंग में अपार संभावनाएं हैं।
कृषि मंत्री ने बताया कि राज्यपाल के करकमलों से विश्वविद्यालय में ड्रोन टेक्नोलॉजी, रिमोट सेंसिंग और क्लाइमेट चेंज से संबंधित नई अत्याधुनिक सुविधाओं का लोकार्पण किया गया है। गुजरात सरकार कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए नई कॉलेजों की स्थापना, सीटों में वृद्धि और पीएच.डी. विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है।
दीक्षांत भाषण में पद्मश्री डॉ. जे. एम. व्यास ने कहा कि मनुष्य को अन्य जीवों से अलग उसकी बुद्धि बनाती है, जो सही चयन की क्षमता देती है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती और अनुसंधान के माध्यम से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना बेहतर उत्पादन प्राप्त करना समय की मांग है।
समारोह के प्रारंभ में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. के. बी. कथेरीया ने विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस अवसर पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित प्रिसिजन फार्मिंग सेंटर, बेसिक साइंस एंड ह्यूमैनिटीज भवन तथा क्लाइमेट स्मार्ट माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी सेंटर का उद्घाटन किया।
दीक्षांत समारोह में कुल 387 स्नातक और 202 परास्नातक विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। साथ ही उत्कृष्ट शिक्षकों, शोधकर्ताओं और मेधावी विद्यार्थियों को 13 गोल्ड मेडल, 77 गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल, 6 कैश प्राइज सहित विभिन्न पुरस्कार प्रदान किए गए।
कार्यक्रम में जिला पंचायत प्रमुख श्री हसमुखभाई पटेल, सांसद श्री मितेशभाई पटेल, विधायक श्री योगेशभाई पटेल, जिला कलेक्टर श्री प्रवीण चौधरी, पुलिस अधीक्षक श्री गौरव जसाणी सहित बड़ी संख्या में अधिकारी, शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
