ईरान के पूर्व क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने इस्लामिक शासन के खिलाफ तीखा प्रहार करते हुए नया सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। उन्होंने दो टूक कहा है कि अब वक्त आ गया है कि ईरान को इस्लामिक तानाशाही से आज़ाद कर धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक रास्ते पर लौटाया जाए।

रजा पहलवी ने सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को देश का सबसे बड़ा संकट करार दिया और कहा कि अब जनता की आवाज़ को और ज़्यादा दबाया नहीं जा सकता।
उन्होंने 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले के ईरान को याद करते हुए कहा कि वो दौर आधुनिकता, सांस्कृतिक आज़ादी और खुली सोच का प्रतीक था – और अब वहीं लौटने का वक्त है।
उनके इस बोल्ड स्टैंड को खासकर ईरानी युवाओं और लोकतंत्र समर्थक तबके का भारी समर्थन मिल रहा है। सोशल मीडिया पर उनके बयानों को लेकर चर्चाएं तेज़ हो गई हैं।
क्या यह एक नई क्रांति की शुरुआत है?
अभी यह कहना जल्दबाज़ी होगी, लेकिन इतना तय है कि ईरान की सियासत एक नए मोड़ पर आ चुकी है।
इस बयान ने मध्य पूर्व की राजनीति में हलचल मचा दी है और आगे क्या होता है, इस पर पूरी दुनिया की निगाहें हैं।
